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नंद घर आनंद भयो के जयघोष से गूंज उठा कथा पांडाल।

रायपुरिया@राजेश राठौड़ 

रायपुरिया निप- जब-जब भी धरती पर आसुरी शक्ति हावी हुईं, परमात्मा ने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। मथुरा में राजा कंस के अत्याचारों से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रुप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। यह उद्गार रायपुरिया में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए श्री हरिहर आश्रम के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. देवेन्द्र जी शास्त्री ने श्रद्धालुओं के बीच कही। नंद घर आनंद भयो के जय जयकार से पूरा पांडाल गूंज उठा । भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए चौथे दिवस आचार्य श्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया। इसके पूर्व आचार्य श्री ने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह सुअवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा सुनते हुए उसी के अनुसार कार्य करें। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा। जब उसके बताए हुए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करें।

*श्रोताओं को दिया आचार्यश्री ने दिया गौ सेवा का संदेश*

आचार्य श्री शास्त्री ने कहा कि दुनियाविचारों से बनती है। जैसे विचार वाले लोग होंगे, वैसा ही समाज और राष्ट्र का निर्माण होगा। इंसान विचारों का पुतला है। घर बनाने, मोटर खरीदने का मन में पहले विचार आता है और उसके बाद उक्त सोच को धरातल पर उतारने की कोशिश शुरू होती है। विचार से सृष्टि का निर्माण होता है। हमें ऐसे संसार का निर्माण करना है, जहां लोग संयम से रहे। गंदगी, बीमारी का नामोनिशान हो। हर कोई स्वच्छ और निरोग रहें। विचार शुद्ध होंगे तभी स्वास्थ्य समाज का निर्माण संभव है। विचारों को शुद्ध करने का काम इस ज्ञान यज्ञ भागवत में होता है। भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य गौ सेवा और समाज के अंतिम पंक्ति पर खड़े मानव सेवा है। जिंदगी की सांसें बहुत कीमती है। जितनी सांसें हम छोड़ चुके है, उसे वापस नहीं ला सकते। हम अपने विचार, आचरण, भाव और चरित्र के शुद्धिकरण में लगना सांसों के लिए सार्थक होगा।

नारीशक्ति के सम्मान से गृहस्थ जीवन मन्दिर बनेगा।

भागवत कथा में श्री शास्त्री ने कहा कि हमारे समाज में भले ही पुरुष के गृहस्थ त्याग को अहम स्थान दिया गया है, मगर एक स्त्री जो विवाह के बाद अपना घर त्याग कर पति के गृहस्थ को जिस निष्ठा से संभालती है वह पुरुष के त्याग से कहीं ज्यादा बड़ा और समाज के सशक्त निर्माण का श्रोत है।

पुरुष सन्यास लेकर त्याग करता है, महिला विवाह के बाद गृहस्थ में रहते हुए निरंतर तप करती है। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से पहले आवश्यक है कि कथा के मूल आधार और इसके संकल्प को समझ लें। उन्होंने कहा कि संकल्प समर्पण के भाव से होता है।

*विवाह के बाद गृहस्थ में रहते हुए निरंतर तप करतीं हैं महिलाएं”*

उन्होंने कहा कि एक स्त्री का तप और त्याग उसी दिन से शुरु हो जाता है जब वह विवाह कर पराए घर और उसके गोत्र को वैसे ही अपना लेती है, जैसे एक सन्यासी गृहस्थ छोडऩे के बाद अपना घर और गोत्र छोड़ देता है। स्त्री विवाह के बाद समाज के नवनिर्माण के लिए अपना योगदान देना शुरु करती है।

यह त्याग नहीं कठिन तपस्या है जो किसी पुरुष के बूते संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एक पुत्र के जन्म से मां का भी जन्म होता है, वहीं बहु के आने से ही किसी स्त्री को सास का दर्जा मिलता है। अगर घर में पति, बेटा और सास अपने निर्माण के प्रतीक स्त्री का वैसा ही सम्मान करें जैसा खुद चाहते हैं तो गृहस्थ खुशहाल और सुदृढ़ होगा।

*स्वच्छता बनाये रखना मां भारती की सेवा।*

पंडित श्रीशास्त्री ने कहा कि गंदगी देश के लिए एक कलंक है। इसे दूर करना है। भारत को स्वच्छ रखना मां भारती की सेवा है। स्वच्छ भारत मिशन एक जागृति है। पांच साल तक अभियान चला, तो हमें साफ रहने की आदत बन जाएगी। देश स्वच्छ रहेगा, तो समाज स्वच्छ होगा और हम निरोग रहेंगे। यज्ञ मानकर अगर इस काम को करें, तो कलंक मिट सकता है।

कथा के दौरान रविवार को भी आचार्यश्री ने हरे रामा, हरे कृष्णा और राधे-राधे की गूंज से पूरे पंडाल को गोकुल धाम में तब्दील कर दिया। भजनों ने ऐसी समा बांधी की भक्त झूमने को विवश हो गए। सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु घंटों भक्ति के रंग में सराबोर रहे। कथा शुभारम्भ से पूर्व व्यास पीठ पूजन यजमान बसंतीलाल सोलंकी ,देवीलाल सोलंकी, वैभव सोलंकी, ने किया। इस अवसर पर दिनेश जायसवाल सातरूंडा , डॉ प्रवीण हामड, शांतिलाल पाटीदार , रमेशचंद्र पाटीदार ढोलना, गजराज दातला झाबुआ, अनोखीलाल पड़ियार रम्भापुर, किशनलाल पाटीदार बदनावर सी एम डी विक्रम आयशर ट्रेक्टर, कमलेश पाटीदार बोलसा, नाथूलाल पाटीदार रायपुरिया, रमेशचंद्र भटेवरा रायपुरिया , मदनलाल पाटीदार खवासा, राजेश पाटीदार, कमला भुआजी पेटलावद, हुकुमसिंह निगवाल तहसीलदार पेटलावद, ईश्वरलाल पाटीदार पटवारी पेटलावद, श्यामपालसिंह चन्द्रावत पटवारी, शांतिलाल बसेर राणापुर, धन्नालाल बसेर रम्भापुर कार्यवाहक अध्यक्ष कलाल समाज झाबुआ- आलीराजपुर, रमेशचंद्र पाटीदार ढोलना, गजराज दातला झाबुआ, अनोखीलाल पड़ियार रम्भापुर, किशनलाल पाटीदार बदनावर सी एम डी विक्रम आयशर ट्रेक्टर, कमलेश पाटीदार बोलसा, नाथूलाल पाटीदार रायपुरिया, रमेशचंद्र भटेवरा रायपुरिया , मदनलाल पाटीदार खवासा, राजेश पाटीदार, कमला भुआजी पेटलावद, हुकुमसिंह निगवाल तहसीलदार पेटलावद, ईश्वरलाल पाटीदार पटवारी पेटलावद, श्यामपालसिंह चन्द्रावत पटवारी, शांतिलाल बसेर राणापुर, धन्नालाल बसेर रम्भापुर कार्यवाहक अध्यक्ष कलाल समाज झाबुआ- आलीराजपुर, श्री महंत दयारामदास जी महाराज हनुमन्त धाम पीपलखूंटा आदि ने किया।

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