थांदला
गरीबों की थाली तक पहुंचने से पहले अंकुरित हुआ सरकारी गेहूं,,,कोटड़ा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में पानी लगने से बोरियों में निकले अंकुर, ग्रामीणों ने उठाए सवाल..

थांदला@उमेश पाटीदार
मध्यप्रदेश सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से दो महीने का राशन एक साथ उपलब्ध करा रही है, लेकिन थांदला तहसील की ग्राम पंचायत कोटड़ा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में रखे गेहूं की स्थिति ने सरकारी खाद्यान्न के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां गेहूं की बोरियों में पानी लगने के कारण गेहूं अंकुरित हो गया। बोरियों में गेहूं के दाने से अंकुर निकलते दिखाई दे रहे हैं, जिससे खाद्यान्न की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।

पानी लगने से गेहूं हुआ अंकुरित
ग्रामीणों के अनुसार उचित मूल्य दुकान में रखी गेहूं की बोरियों में पानी लगने के कारण नमी पहुंच गई। इसके चलते कई बोरियों में रखा गेहूं अंकुरित हो गया। तस्वीरें सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर गरीब परिवारों के हिस्से में आने वाले खाद्यान्न का इस तरह रखरखाव कैसे किया जा रहा है।
सरकार द्वारा जिस अनाज को गरीब परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए उपलब्ध कराया जाता है, यदि वही अनाज वितरण से पहले ही पानी और नमी की चपेट में आकर अंकुरित होने लगे तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
राशन की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि राशन की दुकानों पर खाद्यान्न के भंडारण की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। गेहूं को नमी और पानी से बचाकर रखना दुकान संचालक एवं संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि बोरियों तक पानी कैसे पहुंचा और समय रहते इसकी जानकारी जिम्मेदारों को क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि गेहूं लंबे समय तक इसी स्थिति में पड़ा रहा तो बड़ी मात्रा में सरकारी खाद्यान्न खराब हो सकता है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि अंकुरित गेहूं की स्थिति कब से बनी हुई है और अब तक इसकी सुध क्यों नहीं ली गई।
दो महीने का राशन, लेकिन रखरखाव की व्यवस्था कितनी मजबूत….?
एक तरफ शासन गरीब परिवारों को दो महीने का राशन उपलब्ध कराकर राहत देने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ यदि खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण में ही लापरवाही सामने आए तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पात्र परिवारों को गुणवत्तापूर्ण राशन भी मिले।
औचक निरीक्षण और जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से कोटड़ा की शासकीय उचित मूल्य दुकान का तत्काल औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही दुकान में उपलब्ध पूरे स्टॉक की जांच, गेहूं की गुणवत्ता की जांच तथा पानी लगने के कारणों की पड़ताल करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि खाद्यान्न के रखरखाव में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अंकुरित गेहूं की स्थिति में अब शासन की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे और पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण राशन कैसे उपलब्ध कराया जाएगा।
अब सवाल यह है कि गरीबों के हिस्से का गेहूं पानी की भेंट चढ़कर अंकुरित होने तक जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं पड़ी..? क्या प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच करेगा या फिर सरकारी खाद्यान्न के रखरखाव की यह लापरवाही यूं ही नजरअंदाज कर दी जाएगी…?




