झाबुआ@आयुष पाटीदार
जिले में कम वर्षा के कारण संभावित जल संकट से निपटने एवं आगामी महीनों में पेयजल की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के निर्देशन में विभिन्न स्तरों पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसी क्रम में विगत शुक्रवार जिले की ग्राम पंचायतों में जल चौपालों का आयोजन किया गया था। जल चौपालों के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में उपलब्ध जलस्रोतों, उनमें पानी की वर्तमान स्थिति, जल उपलब्धता की संभावित अवधि तथा जलस्रोतों के सूखने की स्थिति में आगामी महीनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर चर्चा कर ग्राम पंचायतवार अलग-अलग प्रोफाइल तैयार की गई।

ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल प्रबंधन एवं प्रशासनिक अमले के सहयोग के लिए जलदूत भी बनाए गए हैं। जलदूतों को उनके दायित्वों एवं कार्यप्रणाली की जानकारी देने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट की अध्यक्षता में कॉलेज ऑडिटोरियम में जलदूत कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जलदूत बनेंगे गांवों में जल संरक्षण एवं जनजागरूकता की महत्वपूर्ण कड़ी – कलेक्टर डॉ. भरसट
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने कहा कि पेयजल की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक है कि प्रशासन के साथ गांव के लोग भी सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रत्येक गांव में ऐसे व्यक्तियों को तैयार किया जाए, जो स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों की स्थिति की जानकारी रखने के साथ पेयजल प्रबंधन एवं जनजागरूकता में प्रशासन का सहयोग करें। इसी उद्देश्य से जलदूत की अवधारणा को लागू किया गया है। जलदूत स्वैच्छिक रूप से कार्य करते हुए गांव और प्रशासन के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। गांव के पटेल, तड़वी एवं अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के सहयोग से इच्छुक लोगों को भी इस अभियान से जोड़ा जा सकता है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले जलदूतों को प्रोत्साहित एवं पुरस्कृत भी किया जाएगा।

कलेक्टर डॉ. भरसट ने कहा कि इस वर्ष जिले में कम वर्षा होने के कारण कृषि एवं सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। गत वर्ष लगभग 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई थी, जबकि इस वर्ष लगभग 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई है। आगामी समय में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आगामी महीनों के दौरान पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। इसके लिए समय रहते जलस्रोतों की पहचान, संरक्षण एवं वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तैयारी आवश्यक है।
कलेक्टर ने जलदूतों को कहा कि वे अपने-अपने गांव एवं फलियों में उपलब्ध सभी जलस्रोतों की पहचान करें। सार्वजनिक एवं निजी कुओं, हैंडपंपों तथा अन्य जलस्रोतों की वर्तमान स्थिति का आकलन कर यह जानकारी संकलित करें कि उनमें कब तक पानी उपलब्ध रहने की संभावना है। जिन कुओं की सफाई की आवश्यकता है, उनकी जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराएं। इसी प्रकार आवश्यकता के अनुसार कुओं के गहरीकरण एवं अन्य कार्यों के प्रस्ताव भी तैयार किए जाएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि जलदूत अपने क्षेत्र में पेयजल संबंधी समस्याओं की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने के साथ उनके समाधान के लिए पहल भी करें। जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा। जल संरक्षण एवं पेयजल प्रबंधन जनभागीदारी से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है। छोटे-छोटे प्रयासों और सकारात्मक सोच से गांवों में पेयजल की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी गांवों में संभावित पेयजल संकट को ध्यान में रखते हुए पूर्व तैयारी की जा रही है। साथ ही वीबी-जी राम जी के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों में जल संरक्षण एवं जल संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
उपलब्ध जलस्रोतों का संरक्षण एवं पानी का सदुपयोग हमारी प्राथमिकता – सीईओ जिला पंचायत श्री चौहान
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जितेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि जिले में उपलब्ध जलस्रोतों के पानी को संरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। सार्वजनिक पेयजल स्रोतों से पानी के अनधिकृत दोहन को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। सार्वजनिक पेयजल स्रोतों से अनधिकृत रूप से मोटर लगाकर पानी लेने वालों के विरुद्ध मोटर जब्ती एवं अर्थदंड सहित नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने जलदूतों से कहा कि वे ग्रामीणों को पानी के सीमित एवं आवश्यकतानुसार उपयोग के लिए जागरूक करें। पानी की बर्बादी रोकने तथा उपलब्ध जलस्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जलदूतों, ग्रामीणों एवं प्रशासन के आपसी समन्वय और सामूहिक प्रयासों से ही संभावित पेयजल संकट का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकेगा।
जलदूतों की जिम्मेदारियों से संबंधित पोस्टर का विमोचन
कार्यशाला के दौरान जलदूतों के दायित्वों, जल संरक्षण, पेयजल प्रबंधन एवं जनजागरूकता संबंधी गतिविधियों की जानकारी देने वाले पोस्टर का विमोचन किया गया। पोस्टर के माध्यम से जलदूतों को गांवों में उनकी भूमिका एवं जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया।
जलदूतों को दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला में कृषि विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जलदूतों को विभिन्न गतिविधियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान जलस्रोतों की पहचान, जल संरक्षण, उपलब्ध पानी के समुचित उपयोग, पेयजल प्रबंधन तथा कम पानी की उपलब्धता की परिस्थितियों में आवश्यक उपायों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। साथ ही जलदूतों को ग्राम स्तर पर प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर पेयजल संबंधी समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
जल-दूत की जिम्मेदारियाँ
जल-दूत ग्राम का प्रतिष्ठित एवं स्थानीय परिस्थितियों से परिचित व्यक्ति होगा, जो ग्राम की पेयजल संबंधी समस्याओं को संकलित कर प्रशासन को अवगत कराएगा। ग्रामीणों को जल संरक्षण एवं पानी का अपव्यय रोकने के लिए जागरूक करेगा। शासकीय जल स्रोतों से अवैध जल चोरी की सूचना देने, वैकल्पिक जल स्रोतों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा पेयजल संकट की स्थिति में अधिग्रहण योग्य जल स्रोतों को चिह्नित करने में सहयोग करेगा। साथ ही जल चौपाल एवं पानी समिति की नियमित बैठकों के आयोजन में सहभागिता करेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक तथा बड़ी पंचायतों में दो जल-दूत नियुक्त किए जा सकते हैं।
इस दौरान अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अक्षय सिंह मरकाम, पीएचई से दयालु राठौर एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं जलदूत उपस्थित रहे।
दीपावली पर सभी व्यवस्थाएं रहें चाक-चौबंद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव,,,,,अवैध शराब कतई नही बिकने पाए,,,,प्रतिबंधित पटाखों, कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप का उपयोग नही होने पाए,,,मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कानून व्यवस्था एवं आगामी त्यौहारों की तैयारी के संबंध में सभी कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ की वीडियो कान्फ्रेंसिंग....
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