परवलिया

स्कूल में शिक्षक-चपरासी नदारद, बच्चों के भरोसे खुल रहा ताला और हो रही सफाई,,,,BJP नेता ने जताई नाराजगी…

परवलिया@उमेश पाटीदार 

थांदला विधानसभा क्षेत्र के परवलिया स्थित पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल के मिडिल विंग में अव्यवस्थाओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां स्कूल खुलने से पहले बच्चों से ही स्कूल का ताला खुलवाया जा रहा है और परिसर में झाड़ू तक लगवाई जा रही है। स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

बताया जा रहा है कि स्कूल के क्लासरूम और बरामदे में जगह-जगह कचरा पड़ा हुआ है। विद्यार्थियों के अनुसार स्कूल खुलने के काफी देर बाद शिक्षक और चपरासी पहुंचते हैं, जिसके चलते उन्हें स्वयं स्कूल खोलने और सफाई करने की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

मामले की जानकारी मिलने पर भाजपा थांदला मंडल उपाध्यक्ष कुशाल सिंगाड़ ने स्कूल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने स्कूल की अलग-अलग कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से बातचीत की और उनकी समस्याएं जानीं। इस दौरान स्कूल परिसर में सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हुए।

निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि कई बार स्कूल खुलने के समय शिक्षक और चपरासी मौजूद नहीं रहते, जिसके कारण उन्हें ही ताला खोलने और झाड़ू लगाने जैसी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।

मंडल उपाध्यक्ष कुशाल सिंगाड़ ने कहा कि वे स्कूल के पास से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने बच्चों को स्वयं स्कूल का ताला खोलते देखा। अंदर जाकर देखने पर कक्षाओं और परिसर में कचरा दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि पीएम श्री जैसे स्कूलों में शासन द्वारा सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था पर खर्च किया जा रहा है, ऐसे में विद्यार्थियों से इस तरह के कार्य करवाए जाने की शिकायत गंभीर है। उन्होंने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही।

अब सवाल यह है कि जिस स्कूल को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और व्यवस्थाओं का मॉडल माना जाता है, वहां यदि बच्चे ही स्कूल का ताला खोलने और सफाई करने को मजबूर बताए जा रहे हैं, तो जिम्मेदारों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर स्कूल खुलने के समय शिक्षक और कर्मचारी मौजूद क्यों नहीं रहते? बच्चों से सफाई क्यों करवाई जा रही है? और स्कूल परिसर में लंबे समय से कचरा पड़ा रहने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी है?

अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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