रायपुरिया

मां भद्रकाली मां चामुण्डा माताजी दिनभर में बदलती है तीन स्वरूप,,,500 साल पुराना है मां भद्रकाली माताजी मंदिर, भक्तों को सुबह से शाम तक 3 रूपों में होते है दर्शन….

शारदीय नवरात्रिः 9 दिनों तक होगी मातारानी की विशेष आराधना, दूर दूर से पैदल दर्शन के लिए पहुंचते है प्रतिदिन श्रद्धालु

रायपुरिया पेटलावद मार्ग पर भद्रकाली माताजी का मंदिर स्थापित है। माता का हर रूप चमत्कारी व मनोहारी है, जिसके दर्शन मात्र से ही मन प्रसन्न हो जाता है तथा माता की भक्ति में रम जाता है।

पैदल जाते हैं दर्शनार्थी-

शारदीय नवरात्र पर्व में यहां भक्तों के श्रृद्धा का केन्द्र बना रहता है।नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह-शाम के समय पैदल दर्शन करने जाते हैं। यह क्रम पहले दिन से ही प्रारंभ हो जाता है। रायपुरिया के आसपास के इलाको से भी रात में यहां महिलाएं एवं बालिकाएं गरबा रास करने यहां पहुंचती है। नवरात्रि में रोजाना माताजी का विशेष श्रृंगार व पूजा अर्चना होती है। मुख्य मार्ग पर होने से यहां भक्तों का तांता हमेशा लगा रहता है। कई भक्त तो दूरदराज से पैदल ही माताजी के मंदिर दर्शन हेतू आते है। उंची घाटी पर स्थित इस मंदिर के ठीक नीचे कलकल बहती हुई पंपावती नदी का साैंदर्य देखते ही बनता है। चाहे चैऋ नवरात्रि हो या शारदीय नवरात्रि हो, इस मंदिर पर विषेष पूजा-अर्चना का दौर चलता रहता हैं।

रियासतकालीन है मंदिर-

मन्दिर पुजारी दशरथ भारती बताते है की यह मंदिर करीब पांच सौ साल पुराना है, तब से आज तक केवल दो बार ही मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ है। पहली बार 1672 ई. में भटेवरा समाज के द्वारा जो की राजस्थान से आए थे एवं दूसरी बार गांव के राजपरिवार द्वारा इसका जीर्णोद्धार हुआ है। इस मंदिर के पीछे भी एक कहानी प्रचलित है, कहते है की पम्पावर सरोवर के किनारे भीम की पत्नि हड़प्पा ने नरबली रोकने के लिए माताजी को यहां प्रसन्न किया था, क्योकि घटोत्कच्छ भीम की बली चढ़ाना चाहता था। समीप बहने वाली नदी का नाम भी इसीलिए पंपावती पड़ा है।

तीन रूप बदलती हैं माता की प्रतिमा-

मंदिर के पुजारी बताते है की भद्रकाली ओर चामुंडा माता की प्रतिमा दिन में तीन बार रूप बदलती हैं। प्रातः से 12 बजे तक मां बाल अवस्था, दोपहर को युवा ओर शाम 6 से सर्योंदय तक वृद्ध रूप के रूप का धारण कर दर्शन देती हैं। तीनों रूपो के दर्शन के लिए हर समय भक्तों की भीड यहां रहती हैं। माता की महिमा निराली है। सच्चे मन की गई मनोकामनाएं भी पूर्ण करती है। निरूसंतान दंपत्ति को संतान तो पीढितों की पीढ़ा हरती है। दोनों ही नवरात्रि में माता के दर्शन के लिए पेटलावद, रायपुरिया, अनंतखेड़ी सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों सें श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह-शाम के समय पैदल दर्शन करने जाते है।

प्रशासन की लगातार उपेक्षा

क्षेत्र के इस प्रसिद्ध मंदिर की प्रशासन द्वारा अभी तक उपेक्षा ही की गई है। मंदिर के ठीक नीचे बह रही पंपावती नदी की सुंदरता काफी अच्छी लगती है लेकिन इस बार बारिश के कम होने से एक भी बार ऊफान पर नहीं आई अभी सुख गई इस लिए कल कल की आवाज सुनाई नहीं देती है स्थानीय प्रशासन ने भी कभी इसके जीर्णोद्धार या आवश्यक सुविधाओं की मांग को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके चलते आज यह मंदिर अपनी पुरानी जीर्ण हालत मेें चला गया है। मंदिर के की मेन रोड़ होने से यहां से कई नेता और अफसर आए दिन गुजरते है व दर्शन कर चले जाते है लेकिन मंदिर की सुध कोई नही लेता।

आज तक नही बनी मंदिर के जीर्णोद्धार की कोई योजना-

मां भद्रकाली माताजी मंदिर जीर्णोद्धार समिति इस प्राचीन मंदिर को जीर्णोद्धार कर इस एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। यह स्थल रायपुरिया से लगभग 3 किमी दूर पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर के सामने से गहरी खाई में पंपावती नदी भी बहती है, जो मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देती है। हालांकि इसके विकास को लेकर आज तक कोई योजना नहीं बन पाई है। इसे लेकर रायपुरिया क्षेत्र के ग्रामीणों और अन्य लोगों से सहयोग लेकर मंदिर जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ करने का प्रयास किया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!