पेटलावद
आचार्य उमेश मुनि जी महाराज साहब की स्मृति में तीन दिवसीय अणु स्मृति धार्मिक समारोह शुरू,,,,पहले दिन गुणानुवाद सभा एवं सामूहिक आराधना का आयोजन, 80 श्रावक-श्राविकाओं ने किए एकासने…..

पेटलावद डेस्क। प्रवर्तक पूज्य आचार्य श्री उमेश मुनि जी महाराज साहब की स्मृति में पेटलावद स्थानक भवन में 4 से 6 अक्टूबर तक तीन दिवसीय अणु स्मृति धार्मिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है। स्थानक में विराजित साध्वीश्री रुचिताजी महाराज, साध्वीश्री आशाश्रीजी महाराज साहब, साध्वीश्री सौम्यप्रभाजी महाराज साहब एवं साध्वीश्री हर्षाजी महाराज साहब ठाणा-4 की प्रेरणा तथा स्थानकवासी श्रीसंघ एवं धर्मदास गण परिषद के आह्वान पर आयोजित इस समारोह में सामायिक, स्वाध्याय, जप-तप एवं धार्मिक आराधना के माध्यम से आचार्यश्री को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जा रहा है।
समारोह के प्रथम दिन स्थानक भवन में गुणानुवाद सभा एवं सामूहिक आराधना का आयोजन हुआ। गुणानुवाद सभा में पदम मेहता ने अपनी गीतिका के माध्यम से आचार्यश्री उमेश मुनि जी महाराज साहब का स्मरण किया। वहीं श्रीमती विमलादेवी बरबेटा एवं धर्मदास गण परिषद के नीरज मुणत ने अपने उद्बोधन में आचार्यश्री से जुड़ी स्मृतियां साझा कीं।
वक्ताओं ने कहा कि आचार्यश्री द्वारा दिए गए संस्कारों को अपने जीवन में उतारना और उनकी वाणी को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उनके बताए मार्ग पर चलकर धर्म, संयम एवं सदाचार के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
श्रीसंघ अध्यक्ष अशोक मेहता ने बताया कि समारोह के अंतर्गत सामूहिक एकासने का आयोजन किया गया, जिसमें नगर के निजी गार्डन में कुल 80 श्रावक-श्राविकाओं ने एकासना किया। उन्होंने बताया कि आगामी दो दिनों तक भी जप-तप, सामायिक, स्वाध्याय एवं धार्मिक आराधना के साथ अणु स्मृति दिवस मनाया जाएगा।
श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष अनोखीलाल मेहता ने समाजजनों से अपील की कि वे शेष दो दिनों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर जप-तप एवं धार्मिक आराधना करें और अणु स्मृति समारोह को सफल बनाएं।
इस अवसर पर वरिष्ठ श्रावक कांतिलाल झाड़माता, मणिलाल मेहता, जयंतीलाल मेहता, जितेंद्र मेहता, नवयुवक मंडल अध्यक्ष हर्ष चणोदिया, ऋषभ कटकानी, अंकित मुरार, अनूप मेहता, राहुल मुथा, निलेश मेहता, दीपक सोलंकी, स्वप्निल भंडारी, शुभम सोलंकी, विपुल मेहता, संतोष मेहता, काजू मेहता, हर्षित मेहता, मयंक मोदी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं का विशेष सहयोग रहा।





