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खवासा

मुक्तिधाम के बाद अब खेल मैदान की बदलेगी तस्वीर,,,खवासा के युवाओं ने खेल स्टेडियम में रोपे 108 पौधे…!

खवासा@आयुष पाटीदार/आनंदीलाल सिसोदिया

अगर इरादे मजबूत हों और कुछ बदलने का जज्बा हो तो कोई भी जमीन बंजर नहीं रहती और कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। खवासा के युवाओं ने इस बात को सिर्फ कहा नहीं, बल्कि अपने काम से साबित करके दिखाया है। नगर का मुक्तिधाम इसकी सबसे बड़ी मिसाल है, जहां कभी पथरीली जमीन और सूना परिसर नजर आता था, वहीं आज हरियाली ने ऐसी जगह बना ली है कि देखने वाला भी तारीफ किए बिना नहीं रहता। मेहनत और लगन से तैयार की गई यह हरियाली अब खवासा की अलग पहचान बनती नजर आ रही है।

मुक्तिधाम की इसी बदली तस्वीर से प्रेरणा लेते हुए अब नगर के युवाओं ने बामनिया रोड स्थित खेल परिसर की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया है। खेल मैदान को केवल खेल गतिविधियों का स्थान नहीं, बल्कि हरियाली और स्वच्छ वातावरण का केंद्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए युवाओं ने परिसर में करीब 108 पौधे लगाए हैं। इन पौधों में कई प्रकार के पेड़ शामिल हैं, जिन्हें परिसर के अलग-अलग हिस्सों में रोपा गया है।

दरअसल आज जब गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है और शहरों-कस्बों में पेड़ों की कमी साफ महसूस होने लगी है, ऐसे समय में पौधारोपण केवल पर्यावरण दिवस या किसी विशेष अवसर की औपचारिकता नहीं, बल्कि समय की जरूरत बन चुका है। इसी जरूरत को समझते हुए खवासा के युवाओं ने मैदान में उतरकर प्रकृति के नाम यह खूबसूरत शुरुआत की है। आज जो पौधे छोटे हैं, वही आने वाले वर्षों में बड़े पेड़ों का रूप लेकर इस पूरे परिसर को छांव, हरियाली और स्वच्छ वातावरण देंगे।

इस पहल की सबसे खूबसूरत बात यह है कि युवाओं की सोच केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। असली जिम्मेदारी अब इन पौधों को बचाने और बड़ा करने की है। यदि नियमित रूप से इनकी देखभाल होती रही, पानी मिलता रहा और पौधों की सुरक्षा की गई तो आने वाले समय में बामनिया रोड का यह खेल परिसर सिर्फ खिलाड़ियों की वजह से नहीं, बल्कि अपनी हरियाली के कारण भी पहचाना जा सकता है।

मुक्तिधाम ने पहले ही यह दिखा दिया है कि पथरीली जमीन पर भी हरियाली की कहानी लिखी जा सकती है। अब उसी कहानी का अगला अध्याय खेल परिसर में लिखा जा रहा है। यह पहल सिर्फ 108 पौधे लगाने की बात नहीं है, बल्कि उस सोच की शुरुआत है जिसमें विकास के साथ प्रकृति को भी बराबर की जगह दी जा रही है। क्योंकि मैदान में खेलते बच्चों और युवाओं को अगर खुली हवा, पेड़ों की छांव और हरा-भरा वातावरण मिले तो उससे बेहतर तस्वीर किसी नगर की शायद ही हो सकती है।

खवासा के युवाओं की यह पहल नगर के दूसरे लोगों के लिए भी एक संदेश है कि पर्यावरण बचाने के लिए किसी बड़े अभियान का इंतजार करने की जरूरत नहीं। अपने आसपास एक पौधा लगाना और फिर उसे पेड़ बनने तक संभालना भी बदलाव की बड़ी शुरुआत हो सकती है। आज लगाए गए ये 108 पौधे आने वाले कल में सिर्फ पेड़ नहीं होंगे, बल्कि खवासा की हरियाली, स्वच्छ हवा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की विरासत बनेंगे।

मुक्तिधाम से शुरू हुई हरियाली की यह सोच अब खेल मैदान तक पहुंची है। जरूरत है कि यह सिलसिला यहीं न रुके और आने वाले दिनों में खवासा के हर खाली हिस्से में हरियाली दिखाई दे। आखिर पेड़ लगाने वाला सिर्फ आज के लिए नहीं सोचता, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए छांव छोड़कर जाता है।

झाबुआ हलचल टीम की ओर से खवासा के सभी युवाओं को इस सराहनीय पहल के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम निश्चित रूप से प्रेरणादायक है। आज लगाए गए ये पौधे आने वाले कल में हरियाली, स्वच्छ हवा और छांव का आधार बनेंगे। उम्मीद है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और खवासा के अन्य युवा भी इससे प्रेरणा लेकर प्रकृति को संवारने में अपनी भूमिका निभाएंगे।

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