सारंगी
ईश्वर को पाने के लिए अटूट प्रेम और निरंतर याद (स्मरण) की आवश्यकता है भागवत कथा : संत बालकृष्ण नागर…

सारंगी@संजय उपाध्याय
कथा के प्रथम दिवस नगर में भागवत गीता का बैंड बाजो के साथ जुलुश निकला गया व्यास पीठ पर विधि विधान से पूजन कर भगवत गीता को विराजमान किया।
सारंगी में चल रही संगीत मय श्री भागवत कथा में संत बालकृष्ण नागर ने व्यास पीठ से श्रोताओं को बताया
ईश्वर को पाने के लिए अटूट प्रेम और निरंतर याद (स्मरण) की आवश्यकता है। जेसे एक प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे को याद करते है। यह बात ग्राम सारंगी लक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय भागवत कथा प्रवक्ता संत श्री बालकृष्ण जी नागर ने कही। उन्होंने कहा कि जैसे प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे के विचारों में खोए रहते है, याद करते रहते हैं, वैसे ही सांसारिक मोह छोड़कर प्रभु के नाम का सुमिरन, प्रेम और पूर्ण समर्पण से ही भक्ति सर्वोच्च स्तर पर पहुँचती है। जिससे स्वयं प्रभु की कृपा या प्रभु प्राप्त होते है।
आपको भी भगवान की कृपा प्राप्त करनी है तो भगवान को निश्छल मन से याद करो। ताकि आपको भी प्रभु की कृपा प्राप्त हो। श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन भागवत वक्ता संत श्री बालकृष्ण जी नागर ने कहा कि महारास में पांच अध्याय है। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण है। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। नगर सहित रतलाम ,धार, उज्जैन जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे है। कथा के दौरान संत बालकृष्ण नागर ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा की कथा सुनने से जीवन सफल हो जाता है

संकल्प सत्य है तो भगवान भी साथ देते है।
उन्होंने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है इसलिए जीव के अंदर अपार शक्ति रहती है यदि कोई कमी रहती है वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है और द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगे इस मौके पर कथा आयोजक बाबूलाल शंभू लाल पाटीदार परिवार ने आरती का लाभ लिया। इस अवसर पर नगर सहित सेकडो की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे है।





