सारंगी@संजय उपाध्याय
श्रावण माह 30 जुलाई गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसी कारण शिव अराधना के लिए सावन माह सबसे उत्तम और विशेष रूप से फलदाई माना जाता हैं। इस पावन माह में पार्थिव शिवलिंग निर्माण को विशिष्ट माना जाता है, वो इसलिए क्योंकि साधक खुद शिवलिंग का निर्माण करता है और पावन पार्थिव शिवलिंग की पूजा-अर्चना और उसका विषर्जन कर मोक्ष का अधिकारी बनता है। वहीं शास्त्रों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से करोड़ों यज्ञों के बराबर फल भी प्राप्त होता है। इसी आस्था को लेकर समीपस्थ ग्राम बनी के हरिहर आश्रम में 30 जुलाई से 26 अगस्त तक पूरे माह निशुल्क पार्थिव शिवलिंग का निर्माण ग्रामीणों द्वारा हजारो की संख्या में निर्माण कर उनका विसर्जन भागवताचार्य देवेंद्र शास्त्री के सानिध्य में किया जायेगा। यह असयोजन पूरे माह चलता रहेगा। वही सावन माह में पड़ने वाली महा शिवरात्रि पर गौशाला में विशेष आयोजन किया जायेगा।
श्रीकृष्ण काम धेनु गौशाला के पीठाधीश्वर आचार्य देवेंद्र शास्त्री धारियाखेड़ी मंदौसर के अनुसार हिंदू धर्म में सावन माह को पवित्र एवम भगवान शिव की भक्ति का महीना माना जाता है। शिव पुराण में भी इसका जिक्र है, मान्यता है कि सावन माह भगवान शिव प्रिय माह है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह में भगवान शिव का पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत उसकी पूजा-अर्चना और विसर्जन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
श्री शास्त्री ने बताया कि पार्थिव शिव लिंग भय से मुक्ति और मोक्ष का माध्यम हैं। कलयुग में मोक्ष की प्राप्ति और व्यक्ति की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पार्थिव पूजन सबसे उत्तम माना जाता है। मान्यता के अनुसार पार्थिव पूजन से सभी प्रकार के भय दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म में जितने भी देवताओं की पूजन विधियां है, उसमें पार्थिव पूजन के द्वारा शिव की साधना-अराधना ही सबसे आसान और अभीष्ट फल देने वाली है।
भगवान श्री राम ने भी किया था पार्थिव शिवलिंग का निर्माण
आचार्य श्री शास्त्री ने बताया कि भगवान श्री राम नें भी लंका पर विजय पाने व रावण के साथ युद्ध करने से पहले पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी। श्री राम द्वारा इस पूजा को करने के बाद उन्होंने लंका पर विजय प्राप्त की थी। भगवान श्री राम ही नहीं बल्कि न्याय के देवता शनिदेव ने भी सूर्य से अधिक शक्ति पाने के लिए काशी में पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान महादेव की पूजा की थी। वहीं हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग में सबसे पहले कूष्मांड ऋषि के बेटे ने पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी आराधना की थी। माना जाता है कि शिवलिंग का विधिवत पूजन करने से जीवन में सुख, संपत्ति और शान्ति रहती है। साथ ही संतान सुख से वंचित दंपत्तियों की गोद भर जाती है और सभी दुखों से छुटकारा मिलता है।
ऐसे बनाए जाएंगे पार्थिव शिवलिंग
हरिहर आश्रम में वरिष्ठ सदस्य हरिराम पाटीदार (शिक्षक) ने बताया कि भगवान शिव की पार्थिव पूजा का विशेष महत्व माना जाता हैं क्योंकि पंचतत्वों में भगवान शिव पृथ्वी तत्व के अधिपति हैं। पार्थिव शिवलिंग एक या दो तोला शुद्ध मिट्टी लेकर बनाए जाते हैं। इस शिवलिंग को अंगूठे की नाप का बनाया जाता है। भोग और मोक्ष देने वाले इस पार्थिव शिवलिंग के पूजन को किसी भी नदी, तालाब के किनारे, शिवालय अथवा किसी भी पवित्र स्थान पर विसर्जन किया जा सकता है। विगत कई वर्षों से सावन माह में यह पर पार्थिव शिवलिंग बनाने का आयोजन निशुल्क की जाता है। जिसमे क्षेत्र से हजारों की संख्या में श्रद्धालु लाभ लेने पहुंचते है।
पहले इन देवों की करते है पूजा
ग्राम बनी के मुकेश पाटीदार ने बताया कि शिवलिंग बनाने के बाद गणेश जी, विष्णु भगवान, नवग्रह और माता पार्वती आदि का आह्वान कर विधिवत तरीके से षोडशोपचार किया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाने के बाद उसे परम ब्रम्ह मानकर पूजा और ध्यान करते है। मान्यता के अनुसार पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। सपरिवार पार्थिव शिवलिंग बनाकर शास्त्रवत विधि से पूजन करने से परिवार सुखी रहता है।
पार्थिव शिवलिंग की इस तरह की जाएगी पूजा।
ग्राम बनी के वरिष्ठ सदस्य बगदीराम पाटीदार ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा से पहले भगवान के सामने बैठकर मन ही मन पूजा का संकल्प पड़ते है। अब किसी साफ़ जगह पर पवित्र मिट्टी का फूल और चन्दन से शुद्धिकरण करके भगवान शिव के मंत्रों का जाप करते हुए इस मिट्टी में गाय का दूध, गाय का गोबर, गुड़, भस्म और गाय के दूध का बना मक्खन बनाकर शिवलिंग का निर्माण करते है। निर्माण करते समय पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके ही शिवलिंग बनाएं जाते है।
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