रायपुरिया

गरबा पंडाल में कठपुतली डांडिया नृत्य ने मोहा मन, पुरानी लोक संस्कृति की यादें हुईं ताजा,,,बदनावर की श्री गणेश टैलेंटेड टीम ने दी शानदार प्रस्तुति, पारंपरिक कला को देखने उमड़े श्रद्धालु, बुजुर्गों को याद आया अपना जमाना…

रायपुरिया@राजेश राठौड़

शारदीय नवरात्रि के अवसर पर झाबुआ चौराहे पर आयोजित नवदुर्गा मित्र मंडल के गरबा महोत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। मंडल द्वारा धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ भारतीय परंपरा, लोक संस्कृति और प्राचीन कलाओं को भी मंच प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में गरबा पंडाल में कठपुतली डांडिया नृत्य की अनूठी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

धार जिले के बदनावर नगर से आई श्री गणेश टैलेंटेड टीम के कलाकारों ने पारंपरिक कठपुतली कला के माध्यम से डांडिया नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। कठपुतलियों के आकर्षक हाव-भाव, पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य की अनूठी शैली ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति शुरू की, गरबा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु इस प्राचीन लोककला को देखने के लिए उत्सुक नजर आए। प्रस्तुति के दौरान पंडाल में दर्शकों की भीड़ जुट गई।

इस कार्यक्रम को शुभ डायग्नोस्टिक क्लीनिक के संचालक द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। आधुनिकता के इस दौर में जहां मनोरंजन के अनेक नए साधन उपलब्ध हैं, वहीं वर्षों पुरानी कठपुतली कला को मंच पर जीवंत देखना अपने आप में एक विशेष अनुभव रहा। कठपुतली के माध्यम से प्रस्तुत डांडिया नृत्य ने लोगों को भारतीय लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।

कार्यक्रम देखने के लिए रायपुरिया सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। विशेष रूप से बुजुर्ग दर्शक इस प्रस्तुति को देखकर भावुक और उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के सामने वर्षों पुरानी कला को जीवंत होते देख अपने पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं। कभी गांवों और मेलों में कठपुतली का खेल मनोरंजन का प्रमुख माध्यम हुआ करता था, लेकिन बदलते समय के साथ ऐसी कलाएं धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं। ऐसे में इन कलाकारों को मंच देकर पुरानी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास सराहनीय है।

समरसता और संस्कृति का संगम बन रहा गरबा महोत्सव

नवदुर्गा मित्र मंडल का गरबा महोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहकर सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और लोक कलाओं को प्रोत्साहन देने का माध्यम भी बनता जा रहा है। मंडल द्वारा प्रतिदिन अलग-अलग प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कठपुतली डांडिया नृत्य की प्रस्तुति ने इस आयोजन को एक अलग पहचान दी और यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के साथ अपनी पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना भी उतना ही जरूरी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!