रायपुरिया@राजेश राठौड़
बुजुर्गों की कही कहावत है देव झुले मेव खुले’। बारिश का मौसम अब विदाई की ओर है और भादवा माह के भी कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में ग्रामीण अंचल में अब बहते पानी को रोककर सहेजने की जरूरत महसूस होने लगी है।
इस वर्ष बारिश कम होने के कारण अंचल की प्रसिद्ध पंपावती नदी एक बार भी उफान पर नहीं आई। हालांकि नदी-नालों में अभी भी थोड़ा-बहुत पानी बह रहा है, जो पशु-पक्षियों के साथ ही ग्रामीणों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। क्षेत्र के अधिकांश छोटे-बड़े नदी-नालों में पानी का बहाव बना हुआ है।
कम बारिश के चलते खरीफ की फसल तो किसानों ने जैसे-तैसे संभाल ली है, लेकिन अब आगामी रबी फसल को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। वहीं आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई के लिए जलसंकट की स्थिति बनने की आशंका भी ग्रामीणों को सताने लगी है।
ग्रामीणों के अनुसार पेटलावद तहसील क्षेत्र में इस वर्ष करीब 21 इंच बारिश होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। कम बारिश के कारण भूजल स्तर में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी है।
ऐसे में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नदी-नालों पर बने स्टॉपडेमों में समय रहते शटर लगाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि वर्तमान में बह रहा पानी रोका जा सके। इससे पानी का संग्रहण होने के साथ भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी और पशु-पक्षियों के लिए भी पेयजल उपलब्ध रहेगा। साथ ही ग्रामीणों को आने वाले समय में इसका लाभ मिल सकेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के विदा होने से पहले यदि बहते पानी को सहेज लिया जाए तो कम बारिश के कारण पैदा हुई जल संकट की चिंता को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
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