पेटलावद में गूंजा ‘वंदे मातरम’: 150वें वर्ष पर सरस्वती शिशु मंदिर में हुआ ऐतिहासिक सामूहिक गायन, SDM रितिका पाटीदार रहीं अध्यक्ष…

पेटलावद डेस्क। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के आह्वान पर “नमामि भारतम् – वंदे मातरम् एक साथ गायन कार्यक्रम” के अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, पेटलावद द्वारा वंदे मातरम् के 150वें वर्ष पर ऐतिहासिक सामूहिक गायन का आयोजन सांदीपनि विद्यालय ऑडिटोरियम, पेटलावद में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता SDM पेटलावद श्रीमती रितिका पाटीदार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी श्री मुकुटजी चौहान उपस्थित रहे।
*विशिष्ट अतिथि के रूप में* बीआरसी पेटलावद श्रीमती रेखा गिरि, सांदीपनि विद्यालय के प्राचार्य श्री पूरालालजी चौहान, विद्यालय संचालन समिति के अध्यक्ष श्री प्रवीणजी पँवार एवं सचिव श्री सौरभजी चतुर्वेदी मंचासीन रहे।
अतिथियों के द्वारा सर्वप्रथम भारत माता ओर माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर द्वीप प्रज्वलित कर कार्य का शुभारंभ किया गया।
पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती के अवसर पर 25 सितंबर को प्रातः 10:15 बजे से प्रारंभ हुए इस आयोजन में देशभर में एक समय, एक लय, एक स्वर में वंदे मातरम् का गायन किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना विनोद बाफना ने रखी और अतिथि परिचय मुकेश परमार द्वारा करवाया गया
वंदे मातरम् की पृष्ठ भूमि को विस्तार से सौरभ चतुर्वेदी ने बताया कि “वंदे मातरम्” ये दो शब्द नहीं, करोड़ों हिंदुस्तानियों के हृदय की धड़कन हैं। यह वो मंत्र है जिसने गुलामी की बेड़ियों में जकड़े भारत को जगाया, जिसे गाते-गाते शहीद फांसी पर झूल गए। आज जब हम इसके 150 वर्ष पूर्ण होने पर “नमामि भारतम्” कार्यक्रम मना रहे हैं, बंकिम बाबू ने हमें गीत दिया, शहीदों ने उसे अपने रक्त से सींचा, और विद्या भारती ने उसे आज फिर से हर घर तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया है। आइए, हम सब अपने बच्चों को सिखाएं कि वंदे मातरम् गाना कोई औपचारिकता नहीं, अपनी माँ के चरणों में अपना शीश झुकाना है।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष – यह अंत नहीं, एक नई सांस्कृतिक यात्रा का प्रारंभ है।
संस्था द्वारा 1 करोड़ लोगों के साथ गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लक्ष्य के साथ यह आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में विद्यालय का आचार्य परिवार, विभिन्न सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठन, शासकीय अधिकारी, कर्मचारी बच्चे उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रविराज पुरोहित ने किया और आभार पूजा सोनी ने माना। यह जानकारी सरस्वती शिशु मंदिर पेटलावद के प्रधानाचार्य शिवराम खंडहर ने दी।



