अहंकार व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर उसके पतन का कारण बनता है,,,माता-पिता की सेवा एवं गौ सेवा ही चारों धाम है : पंडित कमलेश जी शास्त्री,,,गोवर्धन पूजा कर भगवान को लगाया छप्पन भोग….

सारंगी@संजय उपाध्याय
जब पृथ्वी पर अधर्म , अत्याचार और पाप अत्यधिक बढ़ गया , तब धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा की कारागार में अवतार लिया भगवान का जन्म केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय और अंधकार पर प्रकाश का संदेश है
यह बात कथावाचक पंडित श्री कमलेश जी शास्त्री ठिकाना सारंगी राजघराना गड़ी परिसर में चल रही संगीत मय श्रीमद् भागवत के दौरान कहीं उन्होंने कहा कि भगवान के प्रकट होते ही कारागार के बंधन टूट गए पहरेदार निद्रा में सो गए और वासुदेव भगवान को लेकर गोकुल पहुंचे यह लीलाधर दर्शाती है की जब भगवान कृपा करते हैं सब जीवन के सभी बंधन स्वत: समाप्त हो जाता है इसके पश्चात पुतना वध का प्रसंग सुनाया उन्होंने कहा कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना विष पिलाकर बालक कृष्ण का वध करना चाहती थी परंतु भगवान ने उसका उद्धार कर उसे मातृत्व पद प्रदान किया यह लीला हमें सिखाती है की भगवान केवल दोष नहीं देखते बल्कि भाव को स्वीकार करते हैं भगवान की शरण में आने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी पापी क्यों ना हो उसका भी कल्याण हो जाता है
माखन चोरी लीला का विस्तार पूर्वक वर्णन किया : कथा में शकटा शुरु वध और अगासुर वध की लीलाओं का भी सुंदर वर्णन किया गया इसके अलावा पंडित जी ने भगवान श्री कृष्ण की अत्यंत मधुर एवं भक्ति रस से परिपूर्ण माखन चोरी लीला का विस्तार पूर्वक वर्णन किया कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति भाव विभोर हो उठे और पूरा पंडाल राधे-राधे एवं नन्द के आनंद भयो के जय घोष से गूंज उठा उन्होंने बताया कि गोकुल और वृंदावन की प्रत्येक गोपी भगवान श्री कृष्ण को अपने प्राणों से भी अधिक प्रेम करती थी उनमें प्रमुख रूप से श्री राधा रानी की अष्ट सखियां, ललिता, विशाखा, चितरा,चंपक लता, तुंगविद्या, इंदुलेखा, रंगदेवी और सुदेवी जो भगवान की बाल लीलाओं में संदेव सहभागी रहती थी भगवान श्री कृष्ण की गोचरण लीला कालिया नाग दमन लीला और गोवर्धन लीला का भी वर्णन किया। कथा श्रवण करने राठौर परिवार के साथ नगर के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी भक्त कथा श्रवण कर धर्म लाभ ले रहे हैं।





