रायपुरिया@राजेश राठौड़
गांव में मंगलवार को वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार बड़ी पूजा का आयोजन श्रद्धा और आस्था के साथ किया गया। इस अवसर पर गांव के सभी मवेशियों को एक स्थान से निकाला गया और उन पर पवित्र जल तथा नीम के पत्तों से छींटे दिए गए। ग्रामीणों का मानना है कि इस पवित्र जल का मवेशियों पर छिड़काव करने से वर्षभर पशु बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह पवित्र जल राजस्थान के फतेहनगर गांव से लाया जाता है। बड़ी पूजा के दिन किसान अपने कृषि कार्य और अन्य कामकाज बंद रखते हैं। जल को ग्रामीण अपने घरों में भी ले जाते हैं और घर के अंदर उसका छिड़काव करते हैं। मान्यता है कि इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। जहां पवित्र जल चढ़ाया जाता है, वहां हवन भी किया जाता है।
गांव के समाजसेवी रमेश चौधरी पाटीदार ने बताया कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। रायपुरिया के अलावा आसपास के करीब 6 से 7 गांवों के ग्रामीण भी इस पवित्र जल को ले जाते हैं और अपने गांवों में मवेशियों पर इसका छिड़काव करते हैं। इनमें छपरा पड़ा, सागड़िया, तलाव पड़ा सहित आसपास के गांव शामिल हैं।
मवेशियों पर जल छिड़कने की परंपरा पूरी होने के बाद ग्रामीण ढोल के साथ गांव के विभिन्न मंदिरों में पहुंचे। यहां भगवान को तेल, सिंदूर, अगरबत्ती और श्रीफल अर्पित कर गांव की सुख-समृद्धि की कामना की गई। ग्रामीणों ने प्रार्थना की कि गांव को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखा जाए और सभी परिवारों में सुख-शांति बनी रहे।
बड़ी पूजा के अवसर पर दोपहर तक गांव की अधिकांश दुकानें भी बंद रहीं। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की और वर्षों पुरानी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धा एवं उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की।
Back to top button
error: Content is protected !!