मेघनगर
मेघनगर की करोड़ों रुपये की नल-जल योजना ठप…कारण प्रदूषित पानी….

मेघनगर@मुकेश सोलंकी
क्षेत्र में प्रदूषण की गंभीर समस्या एक बार फिर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, केमिकल युक्त लाल रंग का दूषित पानी मेघनगर की करोड़ों रुपये की नल-जल योजना के फिल्टर प्लांट तक पहुंच गया है। इसके चलते पूरी योजना प्रभावित हो गई है और फिल्टर प्लांट का संचालन ठप पड़ गया है। इससे नगरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पिछले वर्ष भी पहली बारिश के बाद प्रदूषण जल संयंत्र में पहुंच जाने के कारण फिल्टर प्लांट बंद हो गया था और लंबे समय तक शुद्ध पेयजल से नगर वासी वंचित रहे थे।
सुत्रो का कहना है कि दूषित पानी के कारण फिल्टर प्लांट में जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया बाधित हो गई है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो हजारों लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस योजना के ठप होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

किसान जलाशय से सिंचाई नहीं कर पा रहा….कारण प्रदूषित पानी…
मेघनगर के आसपास के क्षेत्रों में भी इस प्रदूषित पानी का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों तक पहुंच रहे रासायनिक युक्त पानी के कारण वे सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे फसलों के खराब होने और आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
पशुपालक भी संकट में…कारण प्रदूषित पानी..
पशुपालकों की परेशानी भी कम नहीं है। क्षेत्र के जल स्रोतों का पानी लाल और दूषित होने से पशु उसे पीने से बच रहे हैं। इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है और ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि दूषित पानी के स्रोत की तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो इसका असर न केवल पेयजल व्यवस्था पर पड़ेगा, बल्कि कृषि, पशुपालन और पर्यावरण पर भी दूरगामी दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की कार्यवाही पर टिकी हैं।





