थांदला
थांदला में तत्त्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी के सानिध्य में 30 तपस्वियो ने सामूहिक नंद चक्र तप की तपस्या की…

थांदला@उमेश पाटीदार
नंद चक्र तप व वर्षीतप तपाराधकों की ऐतिहासिक जयकार यात्रा निकली ।समस्त सामूहिक पारणे , नवकारसी एवं स्वधर्मी वात्सल्य का लाभ नरेंद्र कुमार मयंक कुमार श्रीश्री मार परिवार द्वारा लिया गया तपस्वी का बहुमान करते हुए श्री संघ व नवयुवक मंडल व महिला मंडल के पदाधिकारीगण । जयकर यात्रा में शामिल तपस्वी व श्रावक श्राविकाएं।
थांदला जिनशासन गौरव आचार्य श्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी, संदीपमुनिजी, जंयतमुनिजी, प्रशस्त मुनिजी, सुयशमुनिजी, प्रसन्नमुनिजी, श्रेयांशमुनिजी, व गौरवमुनिजी ठाणा-8 एवं साध्वी निखिलशीलाजी, दिव्यशीलाजी, प्रियशीलाजी, दीप्तिजी ठाणा – 4 के सानिध्य में यहां वर्षावास में त्याग, तपस्याओं का दौर जारी है। इस “धर्मोत्कर्ष वर्षावास 2026” में श्रावक-श्राविकाएं व बच्चें पूरे उत्साह के साथ आराधना कर रहे हैं। श्रीसंघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया व सचिव हितेश शाहजी ने बताया कि यहां तत्त्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा.के सानिध्य में 30 तपस्वियों ने सामूहिक “नंद चक्र तप” की कठोर तप आराधना की 22 दिवसीय इस तप आराधना मे आराधकों ने उत्साहपूर्वक आराधना की ।महोत्सव को लेकर समाजजन में जबरदस्त उत्साह देखा गया श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी व सहसचिव कपिल पीचा ने बताया कि नगर के इतिहास में पहली मर्तबा इतनी बड़ी संख्या में नंद चक्र तप की तपस्या हुई है। जो नगर के इतिहास के पन्ने पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गई है। समस्त तपाराधकों के अनुमोदनार्थ श्री संघ थांदला द्वारा दो दिवसीय “नंद चक्र तप महोत्सव” आयोजित किया गया । महोत्सव को लेकर समाजजनों में जर्बदस्त उत्साह देखा गया ।
श्रीसंघ ने तपस्वियों का बहुमान किया जयकार यात्रा भी निकली
नवयुवक मंडल के अध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा व सचिव प्रांजल भंसाली ने बताया कि महोत्सव के तहत नंद चक्र तपस्वियों की तपस्या के उपलक्ष में बड़ी संख्या श्रावक श्राविकाओं ने सामूहिक उपवास तप की तपस्या की । वही स्थानीय पौषध भवन पर आयोजित धर्मसभा में श्री संघ द्वारा समस्त तपस्वियों का बहुमान किया गया । श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने समस्त तपस्वियो की खूब खूब अनुमोदना की व धन्यवाद दिया। महोत्सव के दूसरे महावीर भवन पर नवकारसी व सामूहिक पारणे का आयोजन हुआ । इसके पश्चात स्थानीय पौषध भवन से समस्त नंद चक्र तप व वर्षीतप आराधकों व अन्य तपस्वियों की जयकार यात्रा पौषध भवन से निकली। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं व बच्चें शामिल हुए जो श्रमण भगवान महावीर स्वामी , आचार्य श्री उमेशमुनिजी , प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी , तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी व तपस्वी की जय जयकार करते हुए चल रहे थे । यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पौषध भवन पर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई । यहां तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी ने कहा कि तप करना कोई सरल कार्य नहीं है मन मजबूत होता है तो ही तपस्या होती है । तप से आत्मा शुद्ध व निर्मल बनती है अपनी शक्ति के अनुसार तप आराधना अवश्य करना चाहिए। शक्ति का गोपन नहीं करना चाहिए । समस्त तपस्वियो को खूब खूब धन्यवाद दिया । सभा को रोचक वक्ता संदीपमुनिजी ने भी संबोधित किया । सभा में श्रीसंघ के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र घोड़ावत , लाभार्थी परिवार के मयंक श्रीश्रीमार, मेघनगर श्री संघ के उपाध्यक्ष विनोद बाफना , रमेश गादिया रतलाम आदि ने अपने विचार व्यक्त किये । संचालन श्री संघ के सचिव हितेश शाहजी ने किया । इसके पश्चात सामूहिक पारणे स्वधर्मी वात्सल्य का आयोजन हुआ । सामूहिक पारणे, नवकारसी व स्वधर्मी वात्सल्य का लाभ नरेंद्रकुमार मयंक श्रीश्रीमार परिवार ने लिया । श्रीसंघ द्वारा समस्त तपस्वियों को अभिनंदन पत्र व चांदी का सिक्का भेंटकर अभिनंदन किया। वही लाभार्थी परिवार सहित कई परिवारों द्वारा तथा कई संस्थाओं द्वारा भी प्रभावना देकर बहुमान किया गया । समारोह में कई श्रीसंघों के श्रावक-श्राविकाएं एवं तपस्वियों के स्वजन व स्नेहीजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहें तथा तपस्वियों की अनुमोदना की ।
20 वर्ष से 76 वर्ष तक की उम्र के तपस्वी…
इस नंद चक्र तप की तपस्या में 20 वर्ष से लेकर युवा वर्ग सहित 76 वर्ष तक की उम्र के तपस्वियों ने यह तपाराधना की। वहीं इस तप आराधना में युवा दंपति ने भी शामिल होकर तप आराधना का लाभ लेकर श्रीसंघ का गौरव बढ़ाया है।





