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संजय@उपाध्याय सारंगी
श्रीकृष्ण कामधेनु गौशाला बनी में दस दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है इस अवसर पर श्री सिद्धि विनायक श्री गणेश जी का पारिजात पुष्प से सहस्त्र पूजन अर्चन किया श्री हरिहर आश्रम बनी के पीठाधीश्वर पूज्य गुरुदेव आचार्य डॉ. देवेन्द्र जी शास्त्री की पावन प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से श्री सिद्धि विनायक गणेश जी का पारिजात पुष्प द्वारा 1000 नामों से सहस्र अर्चन श्रद्धा, भक्ति और दिव्य भाव के साथ संपन्न किया गया इस अवसर पर आचार्य श्री शास्त्री ने बताया कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान गणेश के हजारों दिव्य नामों का स्मरण, हजारों पुष्पों के माध्यम से हजारों भावों का समर्पण और अपने जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित करने का एक सुंदर आध्यात्मिक अवसर है
पारिजात पुष्प क्यों विशेष माना जाता है?
पीठाधीश्वर श्री शास्त्री ने बताया कि सनातन परंपरा में पुष्प भगवान को अर्पित करने का अर्थ केवल सुंदर फूल चढ़ाना नहीं है पुष्प अपने आप में एक संदेश है
पुष्प जब तक पौधे पर रहता है, तब तक वह अपनी सुगंध और सुंदरता से वातावरण को आनंदित करता है जब उसे भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है, तब वह अपनी सुंदरता, सुगंध और अस्तित्व तक को प्रभु के प्रति समर्पित कर देता है इसीलिए पूजा में पुष्प अर्पण को समर्पण का प्रतीक माना जाता है
पारिजात पुष्प को भी भारतीय धार्मिक परंपरा में अत्यंत पवित्र और दिव्य भाव से देखा गया है। इसकी सुगंध भक्त के मन में शांति और पवित्रता का भाव उत्पन्न करती है
जब यही पुष्प भगवान श्री गणेश के चरणों में अर्पित किया जाता है, तो उसके पीछे भाव होता है “हे प्रभु! जैसे यह पुष्प आपके चरणों में समर्पित होकर अपना सर्वस्व आपको अर्पित कर रहा है, वैसे ही मेरा मन, मेरी बुद्धि, मेरे कर्म और मेरा अहंकार भी आपके चरणों में समर्पित हों
सहस्र अर्चन का क्या अर्थ है?
आचार्य श्री ने बताया कि सहस्र अर्थात् एक हजार, भगवान गणेश के सहस्र नामों का उच्चारण करते हुए प्रत्येक नाम के साथ पुष्प अर्पित करना सहस्र अर्चन कहलाता है
भगवान के हजार नाम केवल हजार शब्द नहीं होते
हर नाम भगवान के किसी विशेष गुण, शक्ति, स्वरूप या दिव्य तत्व का स्मरण कराता है
जब भक्त एक-एक नाम बोलता है और एक-एक पुष्प भगवान को अर्पित करता है, तब वह अपने मन को बार-बार भगवान के किसी न किसी दिव्य गुण से जोड़ता है। जेसे एक नाम — एक स्मरण, एक पुष्प — एक समर्पण, एक मंत्र — एक प्रार्थना, एक अर्चन — एक शुभ संकल्प
और जब ऐसे हजार अर्चन होते हैं, तो भक्त का मन बार-बार भगवान के स्वरूप और गुणों में स्थिर होता है
भगवान गणेश के सहस्र अर्चन का आध्यात्मिक संदेश
भगवान श्री गणेश को सनातन परंपरा में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि-विवेक के अधिष्ठाता के रूप में पूजा जाता है इस अवसर पर गौशाला समिति के वरिष्ठ सदस्य बगदीराम पाटीदार, हरिराम पाटीदार, शांतिलाल पाटीदार, पंकज पाटीदार, कमलेश पाटीदार, रामेश्वर पाटीदार आदि सदस्य मौजूद थे
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